Ghumakkadi Baba जानो! अपना मंदिर/धरोहर दिल्ली की एक गुमनाम धरोहर, शीश महल!Ghumakkadi Baba

दिल्ली की एक गुमनाम धरोहर, शीश महल!Ghumakkadi Baba

डॉ शशि शेखर त्रिपाठी, प्रवक्ता इतिहास दिल्ली

कभी मुगल सल्तनत में बुलंद रुतबा रखने वाली एक गुमनाम ऐतिहासिक धरोहर शीश महल, से आपको रूबरू करवाते हैं।

“एक बादशाह की मोहब्बत की नायाब निशानी हो तुम!

सैकड़ों साल पहले बने ऐसे ख्वाब की कहानी हो तुम!!”

शीश महल महज मुगलिया इमारत ही नहीं! किसी की चाहत का खूबसूरत नजराना है!! कभी दिल्ली आकर दीदार करो इसका इतिहास खास पुराना है!!

दिल्ली की एक गुमनाम धरोहर, शीश महल!Ghumakkadi Baba… किसी कवि ने सही कहा है…

“सब दिन नहीं होत एक समान!!”

शीश महल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने 1653 में अपनी खास बेगम इजुलनिशा के लिए कराया था। शीश महल में लाहौर के शालीमार गार्डन व कश्मीर की राय गार्डन की वास्तु कला के मेल की झलक नजर आती है।

उधर आगरा में ताजमहल तामिल हो रहा था तो इधर दिल्ली में शीश महल और दोनों के शाहकार एक ही थे शाहजहां।

बादशाह शाहजहां अक्सर यहां आया करते थे, और उनकी साही महफिलें यही सजा करती थी।

शीश महल ही वह इमारत है, जो कट्टरपंथी मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर की 1665 में ताजपोशी की दवा बनी।

यही पर औरंगजेब हिंदुस्तान के तख्त पर गद्दीनशी हुए थे।

सुरंग भी है यहां…..

यहां एक सुरंग भी है, जो कभी लाल किले तक जाती थी। सुनाई जाते हैं इसकी लंबाई 20 किलोमीटर थी!

इसकी दीवारों पर सुंदर चित्रकारी बेल बूटे नक्काशी नजर आती है जिसको वर्क ने बेरंग बेकार, दिया है।  की नीचे नालियों से होकर बाहर बने कुओं  भूतों चित्रकारी से सजे कमरे हैं। जीने गुसलखाना की तरह इस्तेमाल किया जाता होगा इस इमारत में हर जगह नक्काशी चित्रकारी है पर समय दीवारें छत भी अच्छी नक्काशी से भरपूर हे।

शीश महल कैसे? पहुंचें…

आउट रिंग रोड जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन से ई रिक्शा लेकर शीश महल तक पहुंच सके हैं, हो सकता है आपको थोड़ी मायूसी हो क्योंकि – इंतजाम हां मददगार हैं तो स्थानीय निवासी। नहीं है वरना ही बड़े स्मारक जैसे ताम- झाम… इस इमारत के आसपास अक्सर रौनक रहती है।

उन्होंने भी इसमें हॉन्टेड होने से इंकार किया।हां बोली व्यवस्था छीना होने के कारण शाम ढले पर थोड़ी असुरक्षित कहीं जाती है शरारती दत्तू की वजा से,

सरदार क्या कर रही है!

कहते हैं साल 1983 में इसी पुरातत्व विभाग को सौंप दिया गया, पर इसके बुरे दिन न बदले।

साल 2006 में उच्च न्यायालय ने इसकी बहाली पर सरकार को फटकार लगाई तब काम शुरु हुआ पता नहीं क्यों? रुक गया। इसके माद दिल्ली के उप राज्यपाल ने

इसकी मरम्मत के लिए बड़ी सरकारी मदद दी है। तो दिल्ली आए पर इस शीश महल का दीदार जरूर करें।

शीश महल गवाह है कई बादशाह तो जश्न कारनामा इसने देखा है बुलंद वर्क रुतबा मुगल अंग्रेज हुक्मरानों का।

लेखक,इतिहासकार व संपादक अतीत के अर्थ अनंत वक्ता मीडिया हैं!