Ghumakkadi Baba eXplore एक ऐसा मठ जो सबके लिए पूज्यनीय! जानिए क्यों?…

एक ऐसा मठ जो सबके लिए पूज्यनीय! जानिए क्यों?…

पंकज उपाध्याय, सम्पादक-अनंत वक्ता मगज़ीन दिल्ली

मेरी हावेरी कर्नाटक की पिछले दिनों वाली यात्रा का हिस्सा रहा हावेरी के हुक्केरी मठ का भ्रमण,एक ऐसा मठ जो सबके लिए पूज्यनीय! जानिए क्यों?…

कर्नाटक फ्रीडम फाइटर एसोसिएसन के कार्यक्रम से निबृत्त होकर तड़के मैंने मन बना लिया कि- अब मुझे यहाँ की संस्कृति की झलक दिखने वाली कोई बात हिन्दी भाषियों के सामने रखनी चाहिए! सुबह 6 बजे सदानंद गौड़ा पाटिल नाम के एक क्षेत्रीय साथी के साथ हुक्केरी मठ पहुच गया। वहाँ हमारी भेंट मठ प्रवंधन के एक सदस्य कालवि रप्पा नाशीपुर से हुई। उन्होंने हमें मठ के बारे में बताया और दिखाया।

एक ऐसा मठ जिसकी स्थापना 16 वीं सदी मे इसके मूल पुरुष स्वामी रचोटी के देखे एक स्वप्न के साकार होने की एक कहानी से जुड़ा है। जिसमें उन्नत समाज की कल्पना थी!  वैसे तो पूरे कर्नाटक राज्य में मठों का अपना एक अस्तित्व व स्तर है। और उत्तरी कर्नाटक के हावेरी जिले में ही 63 मठ हैं। जिसमें एक है हुक्केरी मठ, इस समय मठ के संचालक  सदाशिव स्वामी हैं, मैं आपको इस मठ की बेमिसाल पहल के बारे में बता रहा हूँ! इतना प्राचीन फिर भी अत्याधुनिक व्यवस्थाओं वाला समझ नहीं आता कि- प्राचीनता के साथ आधुनिकता का बेजोड़ संगम कैसे? हुआ।

मठ तक कैसे? पाहुचे!

हवाई जहाज

देश व दुनियाँ में कहीं से भी आप बगलोर के लिए या हुब्ली के लिए हवाई जहाज से आयें हुब्ली 70 की.मी. तथा बनलोर तकरीबन 300 की.मी. दूर है।

रेल

हावेरी बंगलोर मुंबई रूट पर हुब्ली से 65 की.मी. दूर हुब्ली बगलोर के बीच का स्टेशन है,

बस…

यह शहर  बगलोर मुंबई हाइवे पर है, बंगलोर से 300 की.मी. दूर है, हावेरी उतरकर शहर में स्थित है हुक्केरी मठ, यहाँ आए और देखें मठ को…

मठ का स्कूल भी है

 संस्कृति की रक्षा के साथ- साथ बचों, युवाओं  में हुनर भी गढ़ने का काम कर रहा है। यहाँ आने के बाद पता चला कि- मठ

प्रबंधन द्वारा प्राथमिक उच्चतर मध्यमिक, व महा विद्यालय स्तर की शिक्षा का प्रबंध किया जाता है। कर्नाटक सरकार के मान्य पाठ्यक्रम के आधार पर शिक्षा दी जाती है। एक महिला विद्यालय भी इसी मठ प्रांगण में मौजूद है हजारों की संख्या में बच्चे व बच्चियाँ इस स्कूल में आते है। स्कूल में शिक्षा के उच्च मानदंडों का ध्यान दिया जाता है, कालवि रप्पा नशीपुर बताते हैं कि- वे इसी स्कूल के छात्र रहे हैं फिर उन्हे वहीं शिक्षक के रूप में सेवा देने का अवसर मिला।

मठ का इतिहास व संचालन व्यवस्था…

कर्नाटक राज्य में बहुतायत संख्या में लिंगायत समाज के लोग रहते हैं। ये वही लिंगायत है , जिसका जिक्र प्राचीन दक्षिण  भारत में गाओराव शाली अतीत रहा है, इस समुदाय के लोग शिवलिंग को 24 घंटे धारण करते हैं, यह मठ भी इसी लिंगायत समाज का है। बात हावेरी शहर की हो रही है तो बता दे कि- हावेरी का  प्राचीन नाम मरी कल्याण था। जिसका मतलब होता है, “सबका कल्याण”  सचमुच सबके कल्याण के लिए मठो का निर्माण किया जाता है। इसी उद्देश्य से की पूर्ति के लिए, इस हुक्केरी मठ की भी स्थापना हुई। 16वीं सदी के बने इस मठ में अभी तक 6 संचालक स्वामी रह चुके हैं, रचोटी स्वामी इस मठ के मूल पुरुष रहे हैं, फिर उनके दिवंगत होने के बाद, छन्न बसवा स्वामी, फिर सिद्ध लिंग स्वामी, क्रमसह शिव बसवा स्वामी, शिव लिंग स्वामी, तथा वर्तमान में सदाशिव स्वामी संचालक हैं । शरीर त्याग चुके पूर्व मठाधीशों की शरीर को मठ प्रांगण में धरती के अंदर समाहित करके समाधि स्थल बनाया गया है, तथा सुबह- साम पूजा की जाती है।

मठ का सामजिक कार्य…

 सनातनी व्यवस्थाओं के अधीन चलने वाले इस हुक्केरी मठ में वर्ष भर में सैकड़ों विवाह किए जाते है। तथा समाज कल्याण के उदेश्य से शहर में होने वाले तमाम गतिविधियों में प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सहभागिता होती है। इस मठ के इसी कंटेन को आप घुमक्कड़ी बाबा youtube चौनल पर जरूर देखें…