रिपोर्ट-पंकज उपाध्याय संपादक- अनंत वक्ता मैग्जीन दिल्ली
दिल्ली से कटक तक की मेरी यादगार रेल यात्रा..ट्रेन प्रेमी घुमक्कड़ी बाबा मीडिया के साथ…
मेरे घुमक्कड़ दोस्तों स्वागत है आपका ट्रेन लवर्स के इस नए एपिसोड में। आज बात करेंगे आनंद विहार से भुवनेश्वर जाने वाली उड़ीसा संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन की। मेरी उड़ीसा यात्रा का मकसद तो हम आपको साझा करेंगे ही लेकिन पहले कुछ जरूरी तथ्य जो इस उड़ीसा संपर्क क्रांति के लिए जरूरी है। आपको जान लेना। यह ट्रेन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल और उड़ीसा तक जाती है। 12,819 रविवार बुधवार को सवा5 बजे यह उड़ीसा से भुवनेश्वर से चलती है। 7:35 पर शाम को यानी 27 घंटे 20 मिनट में यह ट्रेन पूरी करती है अपनी यात्रा। वहीं जब यह दिल्ली से चलती है तो 12820 इसका नंबर हो जाता है और यह सुबह 8:00 बजे वहां से निकलती है। दूसरे दिन 12:20 पे 28 घंटे 20 मिनट यानी 1 घंटा ज्यादा मिनट यानी 1 घंटा ज्याद समय लगा के चलती है मंगलवार और शुक्रवार को इस ट्रेन को दो दशक से ज्यादा हो गया चले। दिवंगत अटल बिहारी वाजपेई जब देश के प्रधानमंत्री थे उस टाइम रेल मंत्री नीतीश कुमार ने 18 संपर्क क्रांति ट्रेनों को झंडी दिखाया था।
हर राज्य से दिल्ली को कनेक्ट करने के लिए संपर्क क्रांति एक्सप्रेस चलाई गई थी। जिनका सफल संचालन आज तक होता रहा है। देश की कई संपर्क प्रांतीय एक्सप्रेस ट्रेनों में चलने का मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस रहा है। बड़ी मजेदार यात्रा होती है। एक राज्य में एक ही जगह शायद यह रुकती है। दूसरे राज्य में स्टॉपेज होता है। लेकिन जिस राज्य की संपर्क क्रांति ट्रेन होती है, उस राज्य में उसके संपर्क करने के छोटे-छोटे स्टॉपेज भी होते हैं। बहुत ऐसी जगहों पे यह क्रॉस करके जाती है। बड़े दुर्गम रूट कई टनल्स पड़ते हैं। इस उड़ीसा संपर्क क्रांति के रास्ते में पहाड़ी क्षेत्र होते हैं। अब यह जो देख रहे हैं आप नजारा यह मुगलसराय रेलवे स्टेशन के आसपास है। अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन नाम से जाना जाता है यह रेलवे स्टेशन। चहलपहल होती है। तकरीबन इस जगह पे 6:30 बजे के आसपास ट्रेन पहुंचती है। इसके बाद दूसरा स्टॉप है नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन गोमो है। रात के 12:00 बजे के आसपास यहां पहुंचती है ट्रेन। इसके बाद मैं भी सो गया। जब मेरी नींद खुली तो टाटा नगर जो कि झारखंड में पड़ता है इसको क्रॉस करके सुबह उड़ीसा पहुंच चुकी थी। बीच में खड़कपुर जंक्शन के आसपास यह बंगाल में भी जाती है। आपको बताते चलें काफी पहले यह ट्रेन खड़कपुर जाती थी और वहां इंजन चेंज होता था। अब खड़कपुर बाईपास से निकलती है। सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं उड़ीसा में था। उड़ीसा के कई रेलवे स्टेशन जैसे भद्रक और तमाम छूट चुके थे। कझर रोड छूट चुका था। अब हम कटक के समीप आ गए थे। यह कटक का महानदी का पुल है। महानदी उड़ीसा की प्रमुख नदियों में गिनी जाती है और आस्था इसके साथ जुड़ी है। कटक पहले राजधानी हुआ करती थी। इस राज्य की लेकिन महानदी कुआ खाई इन दोनों के बीच में जगह कम होने के नाते भुवनेश्वर इस राज्य की राजधानी बनाई गई। फाइनली मैं कटक उतर गया हूं। मुझे कटक जाना था। ये ट्रेन भुवनेश्वर तक जाएगी और कटक शहर को एक्सप्लोर करते हैं आपके साथ। एक बात रह गई थी। कटक शहर में उड़ीसा का हाई कोर्ट भी है। कटक एक पुराना शहर है जो प्राचीनता और आधुनिकता का बेजोड़ संगम है। कटक को एक्सप्लोर हमने किया है। वीडियो आई बटन में है और उड़ीसा टूरिज्म से जुड़ी बहुत सारे कंटेंट्स घुमक्कड़ी बाबा पे है। उसे आप देखिए। एंजॉय कीजिए। दूसरे वीडियो का इंतजार कीजिए।
धन्यवाद..
